/ Mar 05, 2026
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indianmedianews.com
नई दिल्ली। सर्वोच्च न्यायालय ने दिल्ली के 51 प्राइवेट चिकित्सालयो को आर्थिक रूप से कमजोर मरीज का इलाज न करने के प्रकरण में अवमानना का नोटिस जारी किया।Supreme Court of India ने दिल्ली के 51 निजी अस्पतालों को आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के मरीजों को मुफ्त इलाज न देने के मामले में अवमानना (Contempt of Court) का नोटिस जारी किया है। अदालत ने अस्पतालों से पूछा है कि क्यों न उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की जाए और उन्हें दी गई सरकारी रियायतें वापस ले ली जाएँ।
दिल्ली में कई निजी अस्पतालों को सरकारी जमीन बहुत कम कीमत (concessional rate) पर दी गई थी।
इसके बदले अस्पतालों पर यह शर्त लगाई गई थी कि वे गरीब मरीजों को मुफ्त इलाज और बेड उपलब्ध कराएँगे।
अदालत के आदेश के अनुसार अस्पतालों को:
25% OPD (आउटडोर मरीज)
10% IPD (भर्ती मरीज)
आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए मुफ्त रखना अनिवार्य है।
लेकिन जांच में पाया गया कि कई अस्पतालों ने इन नियमों का पालन नहीं किया।
सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस पी.के. मिश्रा और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की बेंच ने कहा कि:
अदालत के आदेश के बावजूद अस्पताल EWS मरीजों को पर्याप्त मुफ्त इलाज नहीं दे रहे हैं।
कई मामलों में 25% की जगह सिर्फ 1% से 10% तक ही OPD सेवाएँ दी जा रही थीं।
अधिकांश अस्पताल 10% मुफ्त भर्ती (IPD) का नियम भी पूरा नहीं कर पाए।



कोर्ट ने कहा कि:
Delhi Development Authority (DDA),
Municipal Corporation of Delhi (MCD),
Land and Development Office (L&DO)
इन एजेंसियों ने भी नियम लागू कराने में लापरवाही बरती और पूरे मामले को “बहुत हल्के में लिया।”
सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि:
दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य सचिव को नोडल अधिकारी बनाया जाए।
वे इन अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई करें और अदालत को रिपोर्ट दें।
संबंधित सरकारी एजेंसियाँ नोडल अधिकारी के साथ सहयोग करें।
इन 51 अस्पतालों में कई प्रसिद्ध अस्पताल भी शामिल हैं, जैसे:
Sir Ganga Ram Hospital
BLK‑Max Super Speciality Hospital
Fortis Escorts Heart Institute
Moolchand Khairati Ram Hospital
Rajiv Gandhi Cancer Institute and Research Centre
Centre for Sight
इस मामले की अगली सुनवाई 24 मार्च 2026 को तय की गई है। अदालत यह देखेगी कि अस्पतालों ने अपने जवाब में क्या कहा और क्या उन्होंने नियमों का पालन शुरू किया या नहीं।
सरल शब्दों में:
सरकारी जमीन की रियायत लेने वाले निजी अस्पतालों को गरीब मरीजों का मुफ्त इलाज करना था, लेकिन कई अस्पताल ऐसा नहीं कर रहे थे। इसलिए सुप्रीम कोर्ट ने 51 अस्पतालों को अवमानना का नोटिस जारी किया है।