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एसआईआर पर सुप्रीम कोर्ट का आदेश, पश्चिम बंगाल में 1.25 करोड़ वोटरों की सूची सार्वजनिक करें


नई दिल्ली । सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल एसआईआर में 1.25 करोड़ वोटरों की सूची सार्वजनिक करने का आदेश दे दिया है। ये वे लोग हैं, जिनके नाम थोड़ी गड़बड़ी वजह से मतदाता सूची से हट दिए गए। अमर्त्य सेन तक को नोटिस भेजा गया, सुप्रीम कोर्ट ने ईसीआई की व्हाट्सएप कार्यप्रणाली पर सवाल उठा दिए।
सोमवार को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया है कि एसआईआर प्रक्रिया के दौरान जिन 1.25 करोड़ लोगों के खिलाफ तार्किक विसंगति की आपत्ति उठी है, उनके नाम प्रकाशित किए जाएं। ये नाम पंचायत और वार्ड कार्यालयों में प्रकाशित होने चाहिए हैं। शीर्ष अदालत ने गौर किया कि दस्तावेजों के सत्यापन के लिए करीब दो करोड़ लोगों को नोटिस जारी किए गए। इन नोटिसों को मोटे तौर पर तीन श्रेणियों में वर्गीकृत किया है पहला मैप किए गए, मैप नहीं किए गए और तार्किक विसंगति शामिल है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि तार्किक विसंगति श्रेणी के अंतर्गत, अधिकारियों द्वारा पिता के नाम का मिलान न होना, माता-पिता की आयु का मिलान न होना और दादा-दादी की आयु में अंतर मिला है।
चीफ जस्टिस (सीजेआई) सूर्यकांत, जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने सुनवाई के दौरान साफ किया कि डॉक्यूमेंट्स के वेरिफिकेशन के लिए करीब 2 करोड़ लोगों को नोटिस जारी किए गए हैं। इसमें से बड़ी संख्या ‘लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी’ कैटेगरी की है। सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से कहा कि जिन लोगों के नाम लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी की सूची में डाले गए हैं, उनकी जांच पारदर्शी तरीके से होनी चाहिए, ताकि लोगों को परेशानी और तनाव न होने पाएं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि करीब 1.25 करोड़ लोगों को नोटिस भेज दिए गए हैं। इन नोटिस में माता-पिता के नाम में फर्क, उम्र का अंतर कम होना, बच्चों की संख्या ज्यादा होना जैसी बातें कही गई है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चुनाव आयोग को उन सभी लोगों की सूची सार्वजनिक करनी होगी, जिन्हें लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी के नाम पर नोटिस दिया गया है।

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